SKM ने SIR को रद्द करने, ज्ञानेश कुमार को हटाने और मतदान के अधिकार बहाल करने की मांग की

Written by sabrang india | Published on: October 23, 2026
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेजा है, जिसमें 13.41 करोड़ नागरिकों के मतदान के अधिकार बहाल करने, चुनावी सुधार करने और छात्रों, महिला पत्रकारों तथा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस हिंसा पर कार्रवाई करने की मांग की गई है।


Image: SKM / Facebook

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने 23 अक्टूबर को किसानों के विरोध मार्च का आह्वान किया है। उनकी मांग है कि 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) को रद्द किया जाए, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाया जाए और उन पर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, उन 13.41 करोड़ नागरिकों के मतदान के अधिकार बहाल किए जाएं, जिनके नाम, SKM के अनुसार, बिना किसी पारदर्शिता के मतदाता सूची से हटा दिए गए थे।

22 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली में जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में, SKM ने कहा कि उसके सदस्य संगठन जिला और तहसील केंद्रों पर जिला मजिस्ट्रेटों और उप-विभागीय मजिस्ट्रेटों के माध्यम से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक ज्ञापन सौंपेंगे। उन्होंने जिला और तहसील मुख्यालयों, राज्य की राजधानियों और नई दिल्ली में भी प्रदर्शन करने की घोषणा की है।

ज्ञापन में कहा गया है कि किसान लोकतंत्र और सभी नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए एकजुट हो रहे हैं, और इसमें राष्ट्रपति से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की गई है।

SIR को रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ कार्रवाई की मांग

SKM ने SIR को तुरंत रद्द करने की मांग की और ज्ञानेश कुमार पर अपनी संवैधानिक शपथ का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उनका आरोप है कि सत्ताधारी भाजपा को सत्ता में बनाए रखने के लिए मतदाता सूची से असली नागरिकों के नाम हटा दिए गए, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य चुनाव आयुक्त को बचा रहे हैं।

ज्ञापन में ज्ञानेश कुमार को हटाने और उन पर कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए, इस स्थिति को 'संवैधानिक गतिरोध' बताया गया है। इसमें कहा गया है कि नियमों में औपचारिक बदलाव करने का अधिकार केवल संसद के पास है, और प्रधानमंत्री संसद में कोई कार्रवाई किए बिना (CEC को हटाने के लिए) इस गतिरोध को हल नहीं कर सकते।

चयन पैनल में बदलाव और चुनावी सुधार

किसान संगठनों ने चुनाव आयुक्तों के चयन से जुड़े 2023 के कानून में संशोधन की भी मांग की है। उन्होंने मांग की है कि चयन पैनल में प्रधानमंत्री द्वारा नामित कैबिनेट मंत्री की जगह भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को शामिल किया जाए।

इन मांगों के साथ-साथ, SKM ने व्यापक चुनावी सुधारों का भी आह्वान किया है, जिसमें 'आनुपातिक प्रतिनिधित्व' (proportional representation) लागू करना, चुनाव में धन और बाहुबल के प्रभाव को रोकना, और चुनावों के लिए सरकारी फंडिंग (state funding) को कानूनी रूप देना शामिल है।

जंतर-मंतर को फिर से विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में बहाल करने की मांग

ज्ञापन में दिल्ली पुलिस के उस आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की गई है, जिसके तहत जंतर-मंतर को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल के रूप में मान्यता खत्म कर दी गई थी। SKM ने कहा कि विरोध करने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हमले संविधान और कानून के शासन का उल्लंघन हैं।

SIR के खिलाफ विरोध कर रहे छात्रों और युवाओं का समर्थन

SIR के खिलाफ विरोध कर रहे लोगों, खासकर छात्रों और युवाओं का समर्थन करते हुए, SKM ने कहा कि 23 अक्टूबर के प्रदर्शनों में नई दिल्ली में प्रदर्शनकारियों (जिनमें युवा छात्राएं भी शामिल हैं) के कथित दमन और उन पर किए गए अत्याचारों का भी विरोध किया जाएगा।

संगठन ने दिल्ली पुलिस के जवानों और RSS-BJP से जुड़े आपराधिक तत्वों पर प्रदर्शनकारियों पर हमला करने का आरोप लगाया। उन्होंने छात्राओं और पत्रकारों के यौन उत्पीड़न का भी आरोप लगाया और इसे "चौंकाने वाला और शर्मनाक" बताया।

SKM ने चेतावनी दी कि अगर प्रदर्शनकारियों पर हमले जारी रहे, तो किसानों को उनकी सुरक्षा के लिए आगे आना पड़ेगा। उन्होंने राष्ट्रपति से मांग की कि इन घटनाओं की जांच हो, जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार किया जाए और पुलिसकर्मियों सहित इसमें शामिल सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

न्यायपालिका की आलोचना

ज्ञापन में न्यायपालिका (जिसमें सुप्रीम कोर्ट भी शामिल है) की आलोचना की गई है, क्योंकि उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुए कथित अपराधों पर स्वतः संज्ञान (suo motu) नहीं लिया।

SKM ने इस आलोचना को शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकार की रक्षा करने और हिंसा के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने की अपनी मांग से जोड़ा है।

कथित तौर पर घरों में नजरबंद किए जाने पर आपत्ति

SKM ने इस बात पर भी चिंता जताई कि राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने से रोकने के लिए कथित तौर पर उनके घरों में ही नजरबंद कर दिया गया है।

ज्ञापन में कहा गया है कि कोई भी कानूनी नियम या कानून स्पष्ट रूप से पुलिस को नागरिकों को "हाउस अरेस्ट" (नजरबंद) में रखने की अनुमति नहीं देता है। इसमें आरोप लगाया गया है कि गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर पुलिस निजी घरों में घुस रही है और कार्यकर्ताओं को अवैध रूप से नजरबंद कर रही है। ऐसा खासकर उन राज्यों में हो रहा है जहां "डबल इंजन सरकारें" हैं।

इन कार्रवाइयों को मौलिक अधिकारों, निजता और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताते हुए, SKM ने सरकार पर भारत को एक "पुलिस स्टेट" (पुलिस-शासित राज्य) में बदलने का आरोप लगाया। उन्होंने ऐसी कार्रवाइयों को रोकने के लिए तुरंत हस्तक्षेप की मांग की।

ज्ञापन में राष्ट्रपति से आग्रह किया गया कि वे इन मांगों पर गंभीरता से विचार करें और बिना किसी देरी के उचित कदम उठाएं।

12 अक्टूबर की बैठक में विरोध प्रदर्शन की तारीखें तय हुईं

हरियाणा के करनाल में 12 अक्टूबर को हुई अपनी बैठक में, SKM ने SIR का विरोध कर रहे छात्रों और युवाओं के समर्थन में 23 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया।



इसके साथ ही, 26 नवंबर को नई दिल्ली और पूरे भारत में प्रदर्शन करने की घोषणा की गई। यह तारीख दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के संघर्ष के छह साल पूरे होने का प्रतीक है। साथ ही, किसानों से यह भी कहा गया कि वे अपनी मांगें पूरी होने तक लंबे समय तक चलने वाले विरोध प्रदर्शनों के लिए तैयार रहें।

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