लोकसभा चुनाव की तारीख नजदीक आते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रबल समर्थक भी अब उनके खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं। अब जानेमाने अर्थशास्त्री और राजनीतिज्ञ मेघनाद देसाई ने भी मोदी की कड़ी आलोचना की है। उन्होने यहां तक कह डाला कि अगले चुनाव में निराश जनता उनके पक्ष में वोट नहीं डालेगी। साथ ही कहा कि पीएम मोदी टीम लीडर नहीं हैं।

समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में देसाई ने कहा, मोदी ने जरुरत से ज्यादा वादे किए और उनका यह विश्वास ही गलत रहा कि वह मजबूत कैबिनेट के बजाय चुनिंदा ब्यूरोक्रेट्स के दम पर पूरा देश चला लेंगे जैसा कि उन्होने मुख्यमंत्री रहते गुजरात में किया था। आखिरकार जनता निराश हो गई। अब लोगों के मन में अच्छे दिन अब तक नहीं आए की भाव आ गई है।
देसाई ने कहा कि मोदी के पास बेहतरीन मौका था लेकिन टीम भावना न होने के चलते वह कुछ नहीं कर सके।
उन्होने आगे कहा कि, बेहतर राजनीतिज्ञ होते हुए भी नरेंद्र मोदी अच्छे टीम प्लेयर नहीं हैं। वह टीम लीडर भी नहीं हैं। वह एक जननेता हैं, लेकिन टीम लीडर नहीं। उनके कैबिनेट में अरुण जेटली और सुषमा स्वराज को छोड़कर किसी के पास अनुभव भी नहीं है। मोदी को इस बात को आइडिया नहीं था कि परिस्थितियां इस हद तक दुष्कर हो जाएंगी और इस स्तर पर पहुंच जाएगी कि दोबारा सत्ता में आने के लिए उन्हें कहना पड़ेगा। तीन हिंदी भाषी राज्यों में हार नरेंद्र मोदी को विनम्र बनाने के लिए काफी है।
देसाई ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तारीफ की। उन्होने डॉ. मनमोहन सिंह की कैबिनेट को मोदी की तुलना में ज्यादा अनुभवी और बेहतर बताया।
उन्होने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कैबिनेट में प्रणब मुखर्जी, अर्जुन सिंह, शरद पंवार और पी. चिदंबरम समेत छह वरिष्ठ और अनुभवी मंत्री थे।
देसाई ने आरबीआई से जुड़े विवादों को लेकर भी मोदी सरकार की आलोचना की है। उन्होने कहा कि लगातार आरबीआई के दो गवर्नरों का चला जाना अच्छी बात नहीं है।
देसाई ने आरबीआई एक्ट की धारा सात को अमल में लाने के मोदी सरकार के कदम को भी गलत बताया। उन्होने आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य के भाषण का स्वागत किया और कहा कि यदि कोई सरकार प्रचंड मूर्खता करना चाहती है तो वह आरबीआई से पैसा लेकर किसानों का कर्जा माफ करने जैसी मूर्खता करे। उन्होंने स्वदेशी जागरण मंच जैसे संगठन को आरबीआई बोर्ड में ज्यादा तवज्जों देने को लेकर भी सरकार की आलोचना की।

समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में देसाई ने कहा, मोदी ने जरुरत से ज्यादा वादे किए और उनका यह विश्वास ही गलत रहा कि वह मजबूत कैबिनेट के बजाय चुनिंदा ब्यूरोक्रेट्स के दम पर पूरा देश चला लेंगे जैसा कि उन्होने मुख्यमंत्री रहते गुजरात में किया था। आखिरकार जनता निराश हो गई। अब लोगों के मन में अच्छे दिन अब तक नहीं आए की भाव आ गई है।
देसाई ने कहा कि मोदी के पास बेहतरीन मौका था लेकिन टीम भावना न होने के चलते वह कुछ नहीं कर सके।
उन्होने आगे कहा कि, बेहतर राजनीतिज्ञ होते हुए भी नरेंद्र मोदी अच्छे टीम प्लेयर नहीं हैं। वह टीम लीडर भी नहीं हैं। वह एक जननेता हैं, लेकिन टीम लीडर नहीं। उनके कैबिनेट में अरुण जेटली और सुषमा स्वराज को छोड़कर किसी के पास अनुभव भी नहीं है। मोदी को इस बात को आइडिया नहीं था कि परिस्थितियां इस हद तक दुष्कर हो जाएंगी और इस स्तर पर पहुंच जाएगी कि दोबारा सत्ता में आने के लिए उन्हें कहना पड़ेगा। तीन हिंदी भाषी राज्यों में हार नरेंद्र मोदी को विनम्र बनाने के लिए काफी है।
देसाई ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तारीफ की। उन्होने डॉ. मनमोहन सिंह की कैबिनेट को मोदी की तुलना में ज्यादा अनुभवी और बेहतर बताया।
उन्होने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कैबिनेट में प्रणब मुखर्जी, अर्जुन सिंह, शरद पंवार और पी. चिदंबरम समेत छह वरिष्ठ और अनुभवी मंत्री थे।
देसाई ने आरबीआई से जुड़े विवादों को लेकर भी मोदी सरकार की आलोचना की है। उन्होने कहा कि लगातार आरबीआई के दो गवर्नरों का चला जाना अच्छी बात नहीं है।
देसाई ने आरबीआई एक्ट की धारा सात को अमल में लाने के मोदी सरकार के कदम को भी गलत बताया। उन्होने आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य के भाषण का स्वागत किया और कहा कि यदि कोई सरकार प्रचंड मूर्खता करना चाहती है तो वह आरबीआई से पैसा लेकर किसानों का कर्जा माफ करने जैसी मूर्खता करे। उन्होंने स्वदेशी जागरण मंच जैसे संगठन को आरबीआई बोर्ड में ज्यादा तवज्जों देने को लेकर भी सरकार की आलोचना की।