घायलों को पहले एक स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया और बाद में दमोह जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। बताया जा रहा है कि उनमें से दो की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें जबलपुर के एक मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रेफर कर दिया गया।

मध्य प्रदेश के दमोह जिले के हरदुआ गांव में मवेशी चोरी और गोवध के शक में कुछ लोगों ने दो मुस्लिम भैंस व्यापारियों को कथित तौर पर डंडों से पीटा और बांध दिया। इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
द ऑब्जर्वर पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना सोमवार रात हिंडोरिया थाना क्षेत्र में हुई। व्यापारियों, जिनकी पहचान आबिद कुरैशी और हसन कुरैशी के रूप में हुई है, ने आरोप लगाया कि जब वे एक पिकअप गाड़ी में भैंसें ले जा रहे थे, तब उन्हें रोका गया और उन लोगों ने उन पर हमला किया, जो उनके अनुसार बजरंग दल से जुड़े थे।
घायलों को पहले एक स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया और बाद में दमोह जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। बताया जा रहा है कि उनमें से दो की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें जबलपुर के एक मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रेफर कर दिया गया।
व्यापारियों का कहना है कि उनका पीछा किया गया और उन्हें पीटा गया
हसन कुरैशी के अनुसार, वह आबिद कुरैशी और एक अन्य व्यक्ति हुसैन खान के साथ भैंसों को सागर के एक गौशाला ले जा रहे थे, तभी हरदुआ क्योलारी के पास कुछ लोगों ने उनकी गाड़ी रोक ली।
व्यापारियों का आरोप है कि उस समूह ने पहले उनकी गाड़ी पर ईंट फेंककर उन्हें रोकने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि वे वहां से भागने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन कई किलोमीटर तक उनका पीछा किया गया और अंत में उन्हें पकड़ लिया गया।
पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें रस्सियों से बांधा गया, घसीटा गया और ग्रामीणों के सामने डंडों से पीटा गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि मारपीट के दौरान उन्हें कैमरे के सामने बयान देने के लिए मजबूर किया गया।
हसन ने आगे आरोप लगाया कि व्यापारियों ने भैंसों के परिवहन से जुड़े दस्तावेज भी दिखाए, लेकिन दस्तावेज दिखाने के बावजूद उन्हें पीटा गया।
घायलों ने इस कथित हमले के संबंध में दीपक नेमा, छुटका और निखिल चौरसिया सहित कई लोगों के नाम लिए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस का कहना है कि जांच चल रही है
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुजीत सिंह भदौरिया ने कहा कि घायलों के बयान दर्ज करने के बाद पुलिस मामला दर्ज करेगी। अधिकारी भैंसों की खरीद और परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रहे हैं।
पीड़ितों का आरोप है कि पुलिस के दखल से वे और अधिक मारपीट का शिकार होने से बच गए। उन्होंने अपनी शिकायत दर्ज करने में हुई देरी पर भी सवाल उठाए हैं।
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मध्य प्रदेश के दमोह जिले के हरदुआ गांव में मवेशी चोरी और गोवध के शक में कुछ लोगों ने दो मुस्लिम भैंस व्यापारियों को कथित तौर पर डंडों से पीटा और बांध दिया। इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
द ऑब्जर्वर पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना सोमवार रात हिंडोरिया थाना क्षेत्र में हुई। व्यापारियों, जिनकी पहचान आबिद कुरैशी और हसन कुरैशी के रूप में हुई है, ने आरोप लगाया कि जब वे एक पिकअप गाड़ी में भैंसें ले जा रहे थे, तब उन्हें रोका गया और उन लोगों ने उन पर हमला किया, जो उनके अनुसार बजरंग दल से जुड़े थे।
घायलों को पहले एक स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया और बाद में दमोह जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। बताया जा रहा है कि उनमें से दो की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें जबलपुर के एक मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रेफर कर दिया गया।
व्यापारियों का कहना है कि उनका पीछा किया गया और उन्हें पीटा गया
हसन कुरैशी के अनुसार, वह आबिद कुरैशी और एक अन्य व्यक्ति हुसैन खान के साथ भैंसों को सागर के एक गौशाला ले जा रहे थे, तभी हरदुआ क्योलारी के पास कुछ लोगों ने उनकी गाड़ी रोक ली।
व्यापारियों का आरोप है कि उस समूह ने पहले उनकी गाड़ी पर ईंट फेंककर उन्हें रोकने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि वे वहां से भागने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन कई किलोमीटर तक उनका पीछा किया गया और अंत में उन्हें पकड़ लिया गया।
पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें रस्सियों से बांधा गया, घसीटा गया और ग्रामीणों के सामने डंडों से पीटा गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि मारपीट के दौरान उन्हें कैमरे के सामने बयान देने के लिए मजबूर किया गया।
हसन ने आगे आरोप लगाया कि व्यापारियों ने भैंसों के परिवहन से जुड़े दस्तावेज भी दिखाए, लेकिन दस्तावेज दिखाने के बावजूद उन्हें पीटा गया।
घायलों ने इस कथित हमले के संबंध में दीपक नेमा, छुटका और निखिल चौरसिया सहित कई लोगों के नाम लिए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस का कहना है कि जांच चल रही है
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुजीत सिंह भदौरिया ने कहा कि घायलों के बयान दर्ज करने के बाद पुलिस मामला दर्ज करेगी। अधिकारी भैंसों की खरीद और परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रहे हैं।
पीड़ितों का आरोप है कि पुलिस के दखल से वे और अधिक मारपीट का शिकार होने से बच गए। उन्होंने अपनी शिकायत दर्ज करने में हुई देरी पर भी सवाल उठाए हैं।
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