अंकिता भंडारी के लिए न्याय की मांग करते हुए, इंडिया गेट पर तड़के हुई कार्रवाई में माता-पिता को हिरासत में लिया गया

Written by sabrang india | Published on: October 16, 2026
सुबह तड़के पुलिस की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब परिवार ने मांग की है कि सिक्किम के राज्यपाल के रूप में दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति को तब तक रोक दिया जाए, जब तक कि CBI कथित VIP एंगल की अपनी जांच पूरी न कर ले।


नई दिल्ली में इंडिया गेट के पास, सिक्किम के राज्यपाल के रूप में दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति के विरोध में प्रदर्शन कर रही 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की मां को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। अंकिता भंडारी की 2022 में उत्तराखंड में हत्या कर दी गई थी। | फोटो: @INCIndia/X

15 अक्टूबर को इंडिया गेट पर रात भर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान, दिल्ली पुलिस ने अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में ले लिया। अंकिता भंडारी 19 साल की रिसेप्शनिस्ट थीं, जिनकी सितंबर 2022 में उत्तराखंड में हत्या कर दी गई थी। परिवार की मांग थी कि वरिष्ठ भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति को तब तक रोक दिया जाए, जब तक कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) अंकिता की हत्या में किसी "VIP" के शामिल होने के आरोपों की जांच पूरी न कर ले।

'द प्रिंट' के अनुसार, माता-पिता को सुबह लगभग 3:45 बजे हिरासत में लिया गया और करीब 5 बजे रिहा कर दिया गया। इस धरने में शामिल कांग्रेस के कई नेताओं को भी हिरासत में लिया गया और बाद में छोड़ दिया गया। ANI, PTI और 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' की रिपोर्टों और वीडियो में पुलिस की इस कार्रवाई को दिखाया गया है, जिसके कारण रात भर चल रहा विरोध प्रदर्शन अचानक खत्म हो गया।













यह हिरासत की घटना, बुधवार शाम (14 अक्टूबर) को इंडिया गेट पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा अंकिता के माता-पिता से मुलाकात करने के कुछ घंटों बाद हुई। उन्होंने अंकिता की हत्या में किसी "VIP" के शामिल होने के आरोपों की जांच की मांग का समर्थन किया। कांग्रेस नेताओं के जाने के बाद, पार्टी के सांसद, पदाधिकारी और कार्यकर्ता परिवार और सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना के साथ धरने पर बैठे रहे।

24 घंटे का अल्टीमेटम और जवाबदेही की मांग

जब पुलिस प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के लिए आगे बढ़ी, तो अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने मांग की कि दुष्यंत गौतम की नियुक्ति को रद्द किया जाए या CBI जांच पूरी होने तक रोक दिया जाए।

PTI के अनुसार, उन्होंने मीडिया से कहा, "हम सरकार को दुष्यंत की नियुक्ति रद्द करने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हैं। अगर सरकार हमारी मांग नहीं मानती है, तो पूरे देश में विरोध प्रदर्शन शुरू किए जाएंगे।"

अंकिता की मां सोनी देवी ने भी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने परिवार को विरोध जारी रखने की अनुमति नहीं दी, तो वे भूख हड़ताल करेंगे, जिसमें उनके घर पर की जाने वाली भूख हड़ताल भी शामिल होगी। माता-पिता ने राष्ट्रपति से मिलने का समय भी मांगा है, ताकि वे अपनी चिंताएं सीधे उनके सामने रख सकें।

परिवार ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि जांच में कथित 'VIP' एंगल की पड़ताल होनी चाहिए, न कि केवल उन तीन लोगों की भूमिकाओं को फिर से देखा जाए जिन्हें अंकिता की हत्या के लिए पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है। उनके पिता ने मांग की है कि हत्या के कथित मकसद और इसमें अन्य लोगों की संभावित संलिप्तता की गहराई से जांच हो। साथ ही, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के किसी मौजूदा या सेवानिवृत्त जज की देखरेख में न्यायिक निगरानी की भी मांग की है। परिवार ने उस कथित 'VIP' की पहचान उजागर करने और जांच से जुड़े कॉल-डिटेल रिकॉर्ड (CDR) तक पहुंच देने की भी मांग की है।

उनकी मांग यह नहीं है कि पहले से मिली सजा को खारिज कर दिया जाए। बल्कि, उनका कहना है कि इन सजाओं के आधार पर यह सवाल नहीं दबाया जाना चाहिए कि क्या अंकिता की हत्या से जुड़ी परिस्थितियों की पूरी तरह से जांच हुई थी या नहीं।

कथित 'VIP' कनेक्शन का मामला अभी भी अनसुलझा है।

अंकिता उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में, ऋषिकेश के पास स्थित 'वनंत्रा' रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थी। 18 सितंबर 2022 को उसकी हत्या कर दी गई और कई दिनों बाद उसका शव चिल्ला नहर से बरामद हुआ।

मई 2025 में, एक सेशन कोर्ट ने रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य (जो पूर्व BJP नेता विनोद आर्य का बेटा है) और रिसॉर्ट के दो कर्मचारियों, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को अंकिता की हत्या का दोषी ठहराया। इन तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। जांच और मुकदमे से यह तो साबित हो गया कि हत्या के लिए वे जिम्मेदार थे, लेकिन एक संभावित 'VIP' से जुड़े आरोपों ने परिवार को परेशान कर रखा है और इस मामले पर लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।

यह कथित 'VIP' एंगल इस दावे पर केंद्रित है कि अंकिता पर रिसॉर्ट के एक मेहमान को "अतिरिक्त सेवाएं" (यानी यौन संबंध) देने का दबाव डाला गया था, जिसका उसने विरोध किया था। उसके परिवार का कहना है कि इन मांगों से जुड़े व्यक्ति की पहचान और उसकी संभावित भूमिका की जांच होनी चाहिए।

यह विवाद दिसंबर 2025 में तब और गहरा गया, जब अभिनेत्री उर्मिला सनावर- जिन्होंने खुद को पूर्व BJP विधायक सुरेश राठौर की पत्नी बताया है- ने कुछ ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग जारी कीं। दावा किया गया कि ये रिकॉर्डिंग राठौर से जुड़ी हैं और इनमें इस मामले के संबंध में एक वरिष्ठ राजनीतिक हस्ती का जिक्र है। सनावर ने गौतम की पहचान उस कथित वीआईपी के रूप में की, जबकि बाद में राठौर ने इस सामग्री की प्रमाणिकता पर सवाल उठाया और दावा किया कि ये क्लिप्स बनावटी हैं या एआई (AI) द्वारा तैयार की गई हैं।

बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड में पार्टी के प्रभारी रहे गौतम ने अंकिता हत्याकांड में अपनी किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है। उन्होंने उन लोगों और राजनीतिक संगठनों के खिलाफ मानहानि की कानूनी कार्रवाई शुरू की है, जो उन्हें इस अपराध से जोड़ रहे हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें इस हत्याकांड से जोड़ने वाली कुछ सोशल मीडिया पोस्ट को हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि ये आरोप प्रथम दृष्टया मानहानिकारक लगते हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने पहले ही कहा था कि उन्हें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे इस हत्याकांड में किसी प्रभावशाली राजनीतिक नेता की संलिप्तता साबित होती हो।

ये तथ्य महत्वपूर्ण हैं और इन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता। उपलब्ध जानकारी के आधार पर, अंकिता हत्याकांड में गौतम को आरोपी नहीं बनाया गया है और उन पर लगाए गए आरोप भी साबित नहीं हुए हैं। साथ ही, गौतम के इनकार करने और मानहानि का मुकदमा दायर करने से यह सवाल खत्म नहीं हो जाता कि क्या सीबीआई ने अंकिता के परिवार द्वारा उठाए गए विशिष्ट सवालों की ठीक से जांच की है या नहीं।

उत्तराखंड में फिर से शुरू हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की कि राज्य सरकार सीबीआई जांच की सिफारिश करेगी। इसके बाद, सीबीआई ने इस मामले में किसी अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज किया, ताकि कथित 'वीआईपी कनेक्शन' से जुड़े आरोपों की जांच की जा सके। अंकिता का परिवार चाहता है कि यह जांच केवल पुरानी जांच के नतीजों को दोहराने के बजाय, उनके उन सवालों के जवाब दे जो अभी भी अनसुलझे हैं।

जांच पूरी होने से पहले राजनीतिक नियुक्ति

12 अक्टूबर को सिक्किम के राज्यपाल के रूप में गौतम की नियुक्ति की घोषणा ने इस पुराने विवाद को फिर से चर्चा में ला दिया है। अंकिता के माता-पिता की मांग है कि जब तक सीबीआई कथित 'वीआईपी एंगल' की जांच पूरी नहीं कर लेती, तब तक गौतम को अपना पद नहीं संभालना चाहिए।

कांग्रेस ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि वे एक ऐसे नेता को इनाम दे रहे हैं, जिसका नाम इन आरोपों के सिलसिले में सामने आया है, जबकि अंकिता का परिवार अभी भी न्याय की तलाश में है। राहुल गांधी ने 'X' (ट्विटर) पर लिखा कि अंकिता का परिवार सालों से न्याय के लिए भटक रहा है, जबकि एक कथित 'वीआईपी' को "सुरक्षा और संवैधानिक पद" देकर पुरस्कृत किया गया है। उन्होंने कहा कि न्याय की मांग में कांग्रेस परिवार के साथ खड़ी रहेगी।

कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने भी राष्ट्रपति से इस नियुक्ति पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। उत्तराखंड कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि जांच पूरी होने से पहले नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से परिवार का दुख और बढ़ेगा, और जवाबदेही को लेकर जनता का भरोसा भी कम होगा।

बीजेपी ने इस हत्याकांड को लेकर राज्य सरकार की कार्रवाई का बचाव किया है। उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने गिरफ्तारियों, विशेष जांच दल (SIT) के गठन, कानूनी कार्यवाही और परिवार को दी गई 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का जिक्र किया। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने CBI जांच की परिवार की मांग पर कदम उठाया है। हालांकि, इन कदमों से परिवार के मुख्य सवाल का जवाब नहीं मिलता: क्या कथित VIP कनेक्शन की ठीक से जांच की गई है? तीन लोगों को दोषी ठहराया जाना एक अहम बात है, लेकिन किसी भी जांच को इस आधार पर नहीं परखा जाना चाहिए कि उसमें कितने लोग दोषी पाए गए, बल्कि इस आधार पर देखा जाना चाहिए कि उसमें किन सबूतों की जांच हुई और किन सवालों के जवाब मिले।

परिवार को हिरासत में लेने से उनके उठाए गए सवालों का समाधान नहीं होता।

सुबह-सुबह परिवार को हिरासत में लेने की घटना ने ध्यान परिवार की मांगों के बजाय अधिकारियों के बर्ताव की ओर मोड़ दिया है। 'द प्रिंट' की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिया था, लेकिन कुछ देर बाद ही उन्हें छोड़ दिया। हिरासत में लिए गए लोगों में पवन खेड़ा, सुप्रिया श्रीनेत, इमरान प्रतापगढ़ी, जोथिमणि और इंडियन यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब जैसे कांग्रेस नेता भी शामिल थे।

राहुल गांधी ने इस कार्रवाई की निंदा की। उन्होंने 'X' पर लिखा कि अंकिता के माता-पिता इंडिया गेट पर शांति से बैठे थे और मांग कर रहे थे कि CBI जांच पूरी होने तक गौतम की नियुक्ति रोक दी जाए, लेकिन इसी दौरान उन्हें हिरासत में ले लिया गया। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी माता-पिता के साथ हुए इस बर्ताव की आलोचना की। उन्होंने कहा कि न्याय मांग रहे परिवार को जवाब देने के बजाय पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ा।

'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी इस हिरासत की निंदा की। उन्होंने 'X' पर एक पोस्ट में कहा कि अंकिता के माता-पिता के साथ हुआ बर्ताव शर्मनाक है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार न्याय मांग रहे नागरिकों के साथ इतनी क्रूरता क्यों दिखा रही है?

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