पत्रकारों के संगठन ने एक महिला रिपोर्टर पर हुए हमले की निंदा की है, साथ ही इस बात की भी निंदा की है कि पुलिस ‘मूक दर्शक’ बनी रही।

Image: Amal KS / Hindustan Times
दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (DUJ) ने शहर के कैंपस में बढ़ती संगठित हिंसा पर चिंता जताते हुए एक बयान जारी किया है। हाल ही में राजनीतिक पार्टियों के छात्र संगठनों के बीच गुटीय झड़पें देखने को मिली हैं। पत्रकारों के संगठन का कहना है कि कैंपस के कार्यक्रमों, रैलियों और विरोध प्रदर्शनों को कवर करने वाले पत्रकार भी खतरे की जद में हैं।
16 सितंबर 2026 को दिल्ली यूनिवर्सिटी कैंपस में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के समर्थकों की एक गुस्साई भीड़ ने कथित तौर पर एक युवा महिला पत्रकार कविता बिश्नोई को धमकाया। यह चुनाव से ठीक पहले का समय था और कई पत्रकार छात्र संघ चुनावों को कवर कर रहे थे।
DUJ के अनुसार, सुश्री बिश्नोई ने हिम्मत दिखाते हुए एक वीडियो जारी किया है जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे एक गुंडा उनके पास आया, उनका स्टोल खींचा और उन पर वामपंथी होने का आरोप लगाया, क्योंकि उनके अजरक स्कार्फ पर लाल बॉर्डर था।
उन्होंने और उनके कुछ सहयोगियों ने इस आरोप को खारिज किया। बाद में उन्हें फिर से रोका गया और दो लड़कियों ने उनका मोबाइल फोन चेक करने की मांग की। उन्होंने बताया कि लाठी-पत्थरों से लैस सौ से ज्यादा लोगों की भीड़ को देखने वाले किसी भी पत्रकार को फोटो या वीडियो लेने की इजाजत नहीं दी गई।
बिश्नोई के वीडियो का हवाला देते हुए DUJ के बयान में कहा गया है कि मौके पर मौजूद पुलिस मूकदर्शक बनी रही, जबकि जिन लोगों ने तस्वीरें लेने की हिम्मत की, उन पर हमला किया गया और उनके कैमरे तोड़ दिए गए। उनका कहना है कि सिर्फ महिला होने की वजह से ही वह पिटाई से बच पाईं।
DUJ शहर की उन यूनिवर्सिटीज में हिंसा बढ़ने पर अफसोस जताता है जो कभी शांतिपूर्ण हुआ करती थीं। साथ ही, वह मांग करता है कि दिल्ली पुलिस बिना किसी भेदभाव के और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार का उल्लंघन किए बिना कानून-व्यवस्था बनाए रखे।
बिना किसी अनुचित दबाव के कार्यक्रमों को स्वतंत्र रूप से कवर करने के हर पत्रकार के अधिकार और शांतिपूर्ण ढंग से वोट देने के हर छात्र के अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए।
यह बयान DUJ की अध्यक्ष सुजाता मधोक, उपाध्यक्ष एस.के. पांडे और महासचिव ए.एम. जिगीश ने जारी किया है।
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दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (DUJ) ने शहर के कैंपस में बढ़ती संगठित हिंसा पर चिंता जताते हुए एक बयान जारी किया है। हाल ही में राजनीतिक पार्टियों के छात्र संगठनों के बीच गुटीय झड़पें देखने को मिली हैं। पत्रकारों के संगठन का कहना है कि कैंपस के कार्यक्रमों, रैलियों और विरोध प्रदर्शनों को कवर करने वाले पत्रकार भी खतरे की जद में हैं।
16 सितंबर 2026 को दिल्ली यूनिवर्सिटी कैंपस में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के समर्थकों की एक गुस्साई भीड़ ने कथित तौर पर एक युवा महिला पत्रकार कविता बिश्नोई को धमकाया। यह चुनाव से ठीक पहले का समय था और कई पत्रकार छात्र संघ चुनावों को कवर कर रहे थे।
DUJ के अनुसार, सुश्री बिश्नोई ने हिम्मत दिखाते हुए एक वीडियो जारी किया है जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे एक गुंडा उनके पास आया, उनका स्टोल खींचा और उन पर वामपंथी होने का आरोप लगाया, क्योंकि उनके अजरक स्कार्फ पर लाल बॉर्डर था।
उन्होंने और उनके कुछ सहयोगियों ने इस आरोप को खारिज किया। बाद में उन्हें फिर से रोका गया और दो लड़कियों ने उनका मोबाइल फोन चेक करने की मांग की। उन्होंने बताया कि लाठी-पत्थरों से लैस सौ से ज्यादा लोगों की भीड़ को देखने वाले किसी भी पत्रकार को फोटो या वीडियो लेने की इजाजत नहीं दी गई।
बिश्नोई के वीडियो का हवाला देते हुए DUJ के बयान में कहा गया है कि मौके पर मौजूद पुलिस मूकदर्शक बनी रही, जबकि जिन लोगों ने तस्वीरें लेने की हिम्मत की, उन पर हमला किया गया और उनके कैमरे तोड़ दिए गए। उनका कहना है कि सिर्फ महिला होने की वजह से ही वह पिटाई से बच पाईं।
DUJ शहर की उन यूनिवर्सिटीज में हिंसा बढ़ने पर अफसोस जताता है जो कभी शांतिपूर्ण हुआ करती थीं। साथ ही, वह मांग करता है कि दिल्ली पुलिस बिना किसी भेदभाव के और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार का उल्लंघन किए बिना कानून-व्यवस्था बनाए रखे।
बिना किसी अनुचित दबाव के कार्यक्रमों को स्वतंत्र रूप से कवर करने के हर पत्रकार के अधिकार और शांतिपूर्ण ढंग से वोट देने के हर छात्र के अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए।
यह बयान DUJ की अध्यक्ष सुजाता मधोक, उपाध्यक्ष एस.के. पांडे और महासचिव ए.एम. जिगीश ने जारी किया है।
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