गांधी समाधि के बाद अब राजघाट का विनाश करेगी सरकार

 
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गांधी समाधि के बाद अब राजघाट का विनाश करेगी सरकार
 
नर्मदा घाटी में विनाश लाना चाहती है, केंद्र की और म.प्र. की सरकार
 
4 सितम्बर 2017, बड़वानी :17 सितम्बर के रोज़ स्वयं का जन्मदिन मनाने के लिए मोदी जी सरदार सरोवर के लोकार्पण का कार्यक्रम आयोजित कर रहे है | इस कार्यक्रम में वह ज़ाहिर करेंगे कि इस महाकाय बाँध का कार्य पूरा हो चूका है जो कि सरासर झूठ है | पुनर्वास, पर्यावरणीय हानि पूर्ति का ही नही, बाँध की नहरों का कार्य भी अधूरा पढ़ा है | सबसे गंभीर बात होगी अगर गुजरात और केंद्र इस बाँध से म.प्र. के बड़े, भरपूर जनसंख्या के गाँवों में भी पानी भरेगा तो, जो विनाश और विस्थापन होगा, उसमे कई परिवार, गाँव ही नही, सांस्कृतिक धरोहर भी नष्ट जायेगी ।
 
राजघाट-अनेक प्रभावित गाँवों में से एक है, यहाँ गाँधी समाधि भी बनी है जहाँ गांधी जी के साथ- साथ कस्तूरबा गांधी और महादेव देसाईं जी की अस्थियाँ दफ़न है | प्रशासन  ने गांधी समाधि को भी बीच रात में उजाड़ दिया था| हम लोगों के विरोध ने गांधी समाधि को दोबारा स्थापित तो करवाया है पर इससे सरकार की घिनोनी नियत का अंदाजा लगा है |
 
राजघाट के लोगों को कई प्रकार के लाभ, विशेषत: घर प्लाट व आजीविका प्राप्त होना बाकी है तब भी वहां के सभी परिवारों को हटाना चाहती है सरकार| राजघाट के केवट पहले भी पुल बनाते वक़्त रोजी-रोटी खाने वाले केवटों ने लड़कर कुछ वैकल्पिक ज़मीन ले ली | आज राजघाट के मछुआरे, केवट (नावडी वाले ), तीर्थ क्षेत्र होने के कारण नर्मदा भक्तों के साथ अपना फूलहार –नारियल का व्यवसाय करने वाले आदि सभी को स्वस्थ व् कायमी पुनर्वास प्राप्त होना बाकी है । मछुवारों, केवटों को जलाशय में/घाट  पर अधिकार होगा, यह शासन का आदेश जो नर्मदा आन्दोलन के सशक्तिकरण के बाद पारित हुआ लेकिन आजतक यह कार्य व पुनर्वास कार्य पूरा नहीं, वसाहटों की सुविधाएँ अधूरी हैं, जलजमाव से हर साल लोग परेशान होते हैं।
 
नर्मदा को ही ख़त्म करना चाहने वाले “लोकार्पण की तैयारी म. प्र. की घाटी, लोग, संसाधन और संरचना के विनाश पर ही महल बांधना चाहते हैं और मध्य प्रदेश के कोई राजनेता नुमाइंदगी भी करने को तैयार नहीं हैं । खबर आई है कि राज्य शासन और बड़वानी के जिलाधीश राजघाट पुल उड़ाने की तैयारी  कर रहे हैं । पुल के बंद करने से हर गाँव के किसानों,मजदूरों को दूर से चलकर आने पर मजबूर होना पड़ेगा । जबकि पानी पुल के नीचे है और 15 फीट तक पानी चढ़ता आया है । 2013 में राजघाट के कई घर, मंदिर, दुकान, पेड़ डूबे थे लेकिन इस साल अभी भी पुल कायम  है इसलिए इसे उड़ाने की तैयारी चल रही है । क्या मोदी जी को यहाँ से राजघाट की आहुति देना चाहती है सरकार?
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 श्यामा बहन, राहुल यादव, सनोबर बी, कमला यादव, देवराम कनेरा, भागीरथ धनगर, पवन यादव
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