क्यों कटघरे में खड़े नहीं किए जा रहे गोरखपुर अस्पताल में 60 मासूमों की मौत के गुनहगार?

Written by Sabrangindia Staff | Published on: August 12, 2017
यूपी में सुशासन का दावा करने वाली आदित्यनाथ सरकार के लिए इस मामले में मुंह छिपाना अब भारी पड़ रहा है। चंद दिनों पहले अपने गृह नगर गोरखपुर में जिस बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज का सीएम ने दौरा किया था वहां पिछले पांच दिनों में 60 बच्चों की मौत हो गई। नौ बच्चे तो उसी दिन मरे थे, जिस दिन सीएम ने अस्पताल का दौरा किया था। अस्पताल में जापानी इंसेफ्लाइट यानी दिमागी बुखार से पीड़ित बच्चों की मौत आईसीयू और आम पीडियाट्रिक्स वार्ड में ऑक्सीजन सप्लाई में कमी से हुई। लेकिन प्रशासन इससे साफ इनकार कर रहा है।

Gorakhpur Children Died
Image: Indian Express

अस्पताल में बच्चों की मौत के बाद हृदय विदारक दृश्य था। मां-बाप के हाथों में बच्चों की लाशें और रोते-बिलखते परिजनों को देख कर किसी की भी रूह कांप जाती।

बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन सप्लाई का संकट बृहस्पतिवार को शुरू हुआ था। अस्पताल के लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट में गैस खत्म हुई तो 90 जंबो सिलेंडर से ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू की गई। रात करीब एक बजे यह भी खत्म हो गई तो अस्पताल में हाहाकार मच गया। साढ़े तीन बजे 50 सिलेंडर से स्थिति संभालने की कोशिश हुई पर यह भी 4 घंटे ही चल सका। इस पर तीमारदारों ने हंगामा शुरू कर कर दिया। 100 बेड वाले वार्ड में भर्ती इंसेफलाइटिस के 73 मरीजों में 54 वेंटिलेटर पर थे।

योगी आदित्यनाथ बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज अस्पताल को एम्स की तरह मॉडल अस्पताल बनाना चाहते हैं। लेकिन अस्पताल प्रशासन किस तरह से चल रहा है इसकी बानगी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्रिंसिपल को ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी के मैनेजर दीपांकर शर्मा की ओर से लिखी चिट्ठी से मिलती है। इसमें कहा गया कि ऑक्सीजन सप्लाई के एवज में अस्पताल पर 68,58,596 रुपये बकाया है। यह बकाये की अधिकतम तय राशि 10 लाख से सात गुना ज्यादा है। ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली एजेंसी पुष्पा सेल्स ने इसका हवाला देते हुए कहा कि इतने बड़े बकाये की वजह से देहरादून  की आईनोक्स कंपनी ने लिक्विड ऑक्सीजन देना बंद कर दिया था। इस चिट्ठी के बावजूद मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने कोई कदम नहीं उठाया।

इस लापरवाही से साफ है कि योगी प्रशासन किस कदर काम कर रहा है। यूपी में अच्छे प्रशासन, चुस्त कानून-व्यवस्था और रोजगार बहाली को लेकर आए दिन फतवे जारी करने वाले सीएम ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है। बात-बात कर प्रेस कांफ्रेंस वाले इस पर कुछ नहीं बोल रहे हैं। गोरखपुर के इस प्रमुख अस्पताल में इतने लोगों की मौत ने राज्य और देश के लोगों को झकझोर कर रख दिया है। किसी दूसरे राज्य में ऐसा होता तो शायद पीएम नरेंद्र मोदी तुरंत ट्वीटर पर ट्वीट कर  देते। बीजेपी जांच के लिए कोई दल भेज देती। लेकिन यह बीजेपी शासित राज्य का मामला है। सीएम संघ के पसंदीदा आदित्यनाथ हैं। इसलिए सारे गुनाह माफ हैं।  
 

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