मोदी सरकार की दोहरी मार, महंगाई बढ़ने के साथ ही छोटी बचत योजना की ब्याज घटाने की तैयारी

Written by Sabrangindia Staff | Published on: November 15, 2017
मोदी सरकार की आर्थिक नीतियां कारोबारियों के साथ ही आम लोगों पर भी कहर ढा रही हैं। महंगाई दर कम होने से बीजेपी अब तक इतरा रही थी। लेकिन सरकार की आर्थिक नीतियों की वजह से इसमें इजाफा होना शुरू हो गया है। नोटबंदी से किसानों पर जो मार पड़ी उसका असर सब्जियों और फलों की महंगाई पर दिखा और इस वजह से खुदरा महंगाई दर बढ़ गई। लेकिन अब थोक महंगाई ने भी रंग दिखाना शुरू कर दिया है।

Small Savings

अक्टूबर की थोक महंगाई दर बढ़ कर 3.59 फीसदी पर पहुंच गई है और यह छह महीने का टॉप लेवल है। सितंबर में यह 2.60 फीसदी था। दरअसल क्रूड और अन्य कमोडिटी की कीमतों में तेजी से इजाफा होने की वजह से महंगाई पर असर पड़ा है। मोदी के लिए भी यह चेतावनी है। अब तक वह इन चीजों की कीमतों को अपने भाग्य से जोड़ते थे। उनका कहना था, मेरी किस्मत अच्छी है इसलिए तेल के दाम कंट्रोल में हैं। लेकिन अब उन्हें इससे जूझना होगा।

महंगाई बढ़ रही है। दूसरी ओर, मोदी सरकार आम लोगों के बचत के लोकप्रिय इंस्ट्रूमेंट्स जैसे पीपीएफ और नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट्स में ब्याज दर कम करने का  मन बना रही है। सरकार जनवरी से शुरू होने वाली तिमाही के लिए स्मॉल सेविंग स्कीमों की ब्याज दरों में कटौती कर सकती है।

मोदी सरकार पिछले कुछ महीनों के दौरान डाकघरों के अलावा अन्य छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें घटा चुकी हैं और इससे छोटी बचत स्कीमों में निवेश करने वालों को करारा झटका लगा है। आम लोगों के हितों की सबसे ज्यादा बात करने वाली सरकार उन्हीं पर सबसे ज्यादा गाज भी गिरा रही है। छोटी बचत योजनाओं के तहत कई इंस्ट्रूमेंट्स ऐसे हैं, जिन पर टैक्स छूट भी मिलती है। इन योजनाओं में ब्याज दर कम करने से अब टैक्स बचाने के उद्देश्य से कम लोग इसमें निवेश करेंगे। यानी आम लोगों के लिए टैक्स बचाने के जो इंस्ट्रमेंट्स थे वे भी अब छिन रहे हैं। कुल मिला कर बगैर सामाजिक सुरक्षा वाले इस देश में सरकार जनता को वित्तीय और आर्थिक तौर पर और असुरक्षित करने में लगी है। लेकिन जनता में इसकी तीखी प्रतिक्रिया हो सकती है। मोदी सरकार गफलत में है। अभी उसे इसका अंदाजा नहीं है।
 
 
 

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