जुमा नमाज़ के बाद शिया समुदाय ने किया वसीम रिज़वी के खिलाफ प्रदर्शन; कहा, हम हलफनामे से सहमत नहीं

Written by Sabrangindia Staff | Published on: August 11, 2017
शिया वक़्फ़ बोर्ड चैयरमैन वसीम रिज़वी के सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मुद्दे पर हलफनामा दाखिल करने के बाद से ही शिया समुदाय में उनके खिलाफ नाराज़गी देखने को मिल रही है। शिया समुदाय के लोगों और धर्मगुरुओं ने इस हलफनामे की निंदा की है।



मजलिसे उलमा ए हिंद और उसके जैसे दूसरे शिया संगठनों के बाद अब उत्तर प्रदेश के शामली ज़िले के बिडौली सादात गांव में आज जुमा की नमाज़ के बाद वसीम रिज़वी के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारे बाज़ी की और अपना गुस्सा दिखने के लिए वसीम रिज़वी का पुतला भी फूका।

प्रदर्शनकारियों का कहना था की हम वसीम रिज़वी द्वारा दाखिल किये गये हलफनामे से सहमत नहीं हैं और ये हलफनामा हमारे समुदाय को भाजपा के साथ जोड़ने की साज़िश है।

“सुन्नियों को ये नहीं सोचना चाहिए की शिया भाजपा के साथ हैं और भाजपा की बोली बोल रहे हैं। हम भी चाहते हैं आयोध्या में फैसला कोर्ट के ज़रिये ही हो,” शहज़ाद क़ैसर, एक प्रदर्शनकारी ने कहा।

कल मजलिसे उलमा ए हिंद ने भी इसके खिलाफ बयान जारी करते हुए कहा था की इस हलफनामे की कोई शरीयत और कानूनी हैसियत नही है।

हालाँकि वसीम रिज़वी अब कह रहे हैं की उनके बयान को मीडिया ने सही से नहीं दिखाया है। वसीम ने कहा कि हलफनामे में केवल इतना ही कहा गया है की 2010 में जो इलाहबाद हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया था वह प्रैक्टिकल नहीं है और साथ ही अयोध्या में दीवार-बराबर मंदिर मस्जिद नहीं बन सकता है।

वहीँ सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड ने भी वसीम रिज़वी के बयानों पर आपत्ति जताई है। चेयरमैन यूपी सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड ज़ुफर फारुकी ने अपने एक बयान में कहा है कि, “शिया वक्फ बोर्ड ने हाईकोर्ट में 2010 तक और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद से संबंधित कोई हस्तक्षेप लिखित अथवा मौखिक रूप से कभी नहीं किया है। अब इस मौके पर वसीम रिज़वी का हस्तक्षेप केवल सस्ती लोकप्रियता हासिल करने और सरकार द्वारा अपनी सुरक्षा बढ़ाने का प्रयास तथा उन पर लगे आरोपों की जांच को गुमराह करना मात्र है।”

उन्होंने कहा कि वसीम रिजवी अपने को शिया समुदाय का प्रतिनिधि होने का दावा करते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि न केवल धर्मगुरु बल्कि शिया समुदाय की महिलाओं और बच्चों द्वारा भी सड़कों पर प्रदर्शन कर वसीम रिजवी पर लगे आरोपों की जाँच करवाए जाने की मांग पिछले कई सालों में की जा रही है।

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