सावित्री बाई फुले जयंती : नफरत के विरुद्ध, अमन, सद्भावना व न्याय के लिए जयपुर में रैली

Written by Sabrangindia Staff | Published on: January 1, 2018
दिनांक - 3 जनवरी 2018
समय -12 बजे
स्थान - शहीद स्मारक से सिविल लाईन फाटक , जयपुर
  
Savitribai Phule
 
प्रिय साथियों ,
 
आज हमारा राजस्थान नफरतऔर हिंसा की घृणित राजनीति की प्रयोगशाला बना हुआ है। राज्य में नफरत आधारित हिंसा दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है और पूरी योजना के साथ आम जनता और खासतौर पर युवाओं के दिमागों में घृणा का जहर भरा जा रहा है। साथ ही भाजपा-आरएसएस सरकार अपनी नवउदारवादीजनविरोधी आर्थिक नीतियों के द्वारा समाज के हर तपके पर हमला कर रही है I विरोध के स्वर सभी वर्गों से उठ रहे हैं, चाहे वह मजदूर-किसानछात्र-नौजवानोंर्मचारीआदिवासीदलितों सहित या आम जन हो I खेती किसानी का सवाल हो या जनउपयोगी सेवाएं सभी क निजीकरण करते हुये उन्हें मुनाफा वसूली के लिये देशी-विदेशी पूंजीपतियों और कंपनियों को सौंप रही है I प्रदेश में आर्थिक बदहाली से उपज रहे जनाक्रोश को सरकार- विरोधी जनांदोलन में बदलने से रोकने के लिये सरकार उन ताकतों के साथ खड़ी है जो बहुसंख्यक धर्मं के संप्रदायीक संगठन हैं और धर्मं के नाम पर लोगों भड़काने का काम कर रहे है।
 
प्रदेश के साम्प्रदायीकरण की तस्वीर अत्यंत भयावह हो चुकी है ,मुसलमानों और ईसाईयों को निशाना बना कर हिंसक हमले किये जा रहे है और उनके विरुद्ध एक योजना बद्ध नफरत फैलाई जा रही है । जिस तरह से 6 दिसंबर को राजसमन्द में एक प्रवासी मुस्लिम मजदूर अफराजुल को लव जिहाद की आड़ में धोखे से बुलाकर मारा गया ,जलाया गया और इस बर्बर हत्या का लाइव वीडियो बनाया गया ,वह नफरत से भरी हिंसा की पराकाष्ठा कहा जा सकता है ।
 
पिछले 9 महीनों में राज्य में कभी गाय के नाम पर, तो कभी स्वच्छ भारत के नाम पर और अब तो केवल मुस्लमान होने पर बर्बर हिंसा और हत्याओं का सिलसिला जारी है । हतायों का क्रम इस प्रकार रहा :
 
अप्रेल, 2017 को गौतस्करी के नाम पर नूंह के पशुपालक किसान पहलू खान जो अपने 2 बेटों और गाँव के दो अन्य साथियों के साथ जयपुर से कुछ गाय खरीद कर गाँव लौट रहे थे तो बहरोड़, अलवर जिले में भीड़ द्वार बुरी तरह पीट पीट कर घायल कर दिया गया जिससे 3 अप्रेल को मौत हो गई I पुलिस जांच ने नामज़द लोगों को जांच के बाहर कर दिया और जिन 7 को गिरफ्तार किया उन सभो को ज़मानत मिल गयी I 16 जून, 2017 को प्रतापगढ़ में जफर खान की पीट-पीट हत्या कर दी गई जब उन्होंने नगर पालीका के कर्मचारीयों को स्वच्छ भारत की आड़ में औरतों के साथ कर रहे बदसलूकी को रोकने की कोशिश की I आज दिन तक किसी की भी गिरफ़्तारी नहीं हुई I सरकार इस मामले को सामान्य मौत बताने में लगी हुई है I 10 नवम्बर, 2017 को कुछ गायों को खरीद कर अपने गाँव पहाड़ी-कमान, भरतपुर जिले ले जा रहे उमरखांजावेद और ताहिर पर कथित गौरक्षकों ने हमला किया और उमरखां की गोली मार कर हत्या कर उसकी लाश 15 किलोमीटर दूर रेलवे लाइन पर छोड़ दी गई जिससे पूरे साक्ष्य मिट जायें I पुलिस ने 8 हत्यारों में से सिर्फ 2 को गिरफ्तार किया और उल्टा उमर खान के दो साथियों को गौ तस्करी के नाम पर जेल में बंद करवा दिया I अगस्त 2017 मेंही सीकर के भगता राम मीना को भी गाय के नाम पर पीट पीट दबंग जाति के लोगों ने मार डाला क्यूंकि उसकी गाय उनके खेत में चली गई थी I 6 दिसम्बर, 2017 को अलवर शहर में तामील हुसैन को गौतस्करी के नाम पर बीच रात में एनकाउन्टर दिखा कर मार डाला गया I 6 दिसम्बर को ही राजसमन्द में अफराजुल को लव जिहाद के नाम पर एक शम्भू लाल रेगर ने बहुत ही बर्बर ढंग से मार डाला और इस हत्या का विडियो बना कर सार्वजनिक क्षेत्र में फेलाया I राजसमन्द, नफरत की राजनीति में एक नया अध्याय है Iअफराजुल को हत्यारा शम्भू लाल जानता तक नहीं था, पर सिर्फ और सिर्फ मुसलमान होने की वजह से उसकी जघन्य हत्या की गई I 6 दिसम्बर RSS के सोच के संगठनो के लिए शौर्य दिवस के रूप में मनाया जाता है I शम्भू लाल हिंदुत्व के शौर्य की एक और मिसाल पेश करना चाहता था और जिस रूप में उस विडियो को वायरल किया गया वह एक हीरो बन गया Iजिस तरह से साम्प्रदायिक तत्वों ने उस हत्या और हत्यारे को महिमा मंडित किया और उसके पक्ष में सड़कों पर उतरे वह नफरत की पराकाष्ठा कही जा सकती है ।मिसाल के तोर पर जब कुछ मुस्लमान संगठनो ने राजसमन्द की घटना के विरुद्ध 8 दिसम्बर को उदयपुर में विरोध प्रदर्शन किया तो उनके विरोध में बहुत बड़ी संख्या में भगवा सांप्रदायिक संगठनो ने जिला अदालत परिसर में घुस कर भवन के गुम्बद पर भगवा झंडा गाड़ दिया I प्रदेश भर में साम्प्रदायिक तत्व  राज्य के समर्थन से बेख़ौफ़ हो कर हिंसा और नफ़रत फैला रहे है, ऐसे लगने लगा है की बस अब नफरत की राजनीति का ही बोल बाला रहेगा I
 
यह भी ज़रूरी है कहना की दक्षिण राजस्थान में आदिवासी क्षेत्रों में रह रहे ईसाई समुदाय को धर्मांतरण करने के नाम पर उत्पीड़न किया जा रहा है, इसी तरह जाति के नाम पर दलितों की हत्या आम बात हो गई है और डायन तथा इज़्ज़त के नाम पर महिलाओं के विरुद्ध भी नफरत आधारित हिंसा बढ़ रही है ।
 
इन्हीं विकरालभयावह परिस्थितियों को मद्देनजर रख कर राजस्थान के शांति प्रिय एवं सौहार्द चाहने वाले लोगों ने नफरत के खिलाफ,अमन,सद्भावना और न्याय के लिए लगातार गतिविधि आयोजित की हैं I प्रदर्शन, धरने, अमन कारवां, पुलिस द्वारा सही जाच को लेकर निगरानीअदालती कार्यवाही में दखल इत्यादि हम लगातार कर रहे हैं . अब स्पष्ट है की हमे अल्प कालीन और दीर्ध कालीन दोनों ही स्तरों पर काम करना है I हर तहसील और जिले में अमन समितियां हमें तत्काल बनानी होगी, जिससे इस नफरत के माहोल को रोका जा सके I जो कानूनी मामलें हैं उपरोक्त हत्याओं को लेकर, उनपर लगातार निगरानी रखनी होगी और एक कानूनी निगरानी समिति गठित करना होगा I अमन के लिए विभिन्न समुदायों के बीच संवाद रखने होंगे, जैसे दलित, आदिवासी और मुस्लिम समुदाय के बीच I इस बार हम 3 जनवरी, सावित्री बा फुले जयंती के अवसर पर एक रैली का आयोजन कर रहे है । रैली 3 जनवरी 2018, को दोपहर 12 बजे शहीद स्मारक,  जयपुर पुलिस आयुक्तालय के सामने ( MI रोड) से सिविल लाइन्स फाटक जाएगी Iजिसमें आप सब जरूर पंहुचे
 
निवेदक 
 
राजस्थान के अमन पसंद नागरिक एवम संगठन

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