झारखंडः भीड़ द्वारा अलिमुद्दीन की हत्या के गवाह जलील को कोर्ट में दी गई धमकी, संदिग्ध परिस्थिति में पत्नी की मौत

Written by SabrangIndia Staff | Published on: October 12, 2017
भीड़ द्वारा अलिमुद्दीन अंसारी की हत्या मामले में चश्मदीद गवाह जलील अंसारी को आज यानी 12अक्टूबर 2017 को रामगढ़ अदालत में गवाही देना था। अलिमुद्दीन अदालत में था तभी उसे सूचना मिली कि उसकी पत्नी दुर्घटना में घायल हो गई है। अदालत में पहचान पत्र की जरूरत के चलते वह अपने पति का पहचान पत्र लाने जा रही थी।

जलील अंसारी ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को बताया कि बजरंग दल के सदस्यों ने अदालत में उसे और उसकी पत्नी को गवाही देने को लेकर अदालत परिसर में धमकी दी थी। मानवाधिकार कार्यकर्ता को जलील ने बताया कि पहचान पत्र लाने के लिए जब मेरी पत्नी बच्चे के साथ अदालत से गई तो उसके बाइक को पीछे से सुनियोजित तरीके से एक वाहन ने धक्का मारा जिससे उसकी मौत हो गई।

8 जुलाई 2017 की द इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक पुलिस ने कहा कि गौरक्षक समिति का सदस्य संदिग्ध राजकुमार जिसकी नई नियुक्ति हुई है उसने 29जून को जब अंसारी मार्केट से निकला तो उसका पीछा किया। मांस का कारोबार करने वाले अंसारी को झारखंड के रामगढ़ जिले में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला। पुलिस ने घटना के दिन अंसारी का पीछा करने वाले आरोपी की गिरफ्तारी की घोषणा की। उसने मुख्य आरोपी को अंसारी की गतिविधियों के बारी में जानकारी दी थी और हमले में शामिल हुआ था। इस हमले में अंसारी की मौत हो गई थी। इससे गौरक्षकों तथा स्थानीय पुलिस के बीच साठगांठ का पता चला।

पुलिस ने इंडियन एक्सप्रेस से बताया कि 29 जून को राजकुमार ने अंसारी का उस समय पीछा किया जब वह रामगढ़ से 15 किलोमीटर दूर स्थित बाजार निकला था,संदेह है कि राजकुमार स्थानीय गौरक्षक समिति का नियुक्त किया गया नया सदस्य है। पुलिस ने बताया कि कुमार को बुधवार को हिरासत में लिया गया और गुरूवार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने ये भी कहा कि हमले के बाद अंसारी के मारुति वैन से मांस के नमूनों का प्रयोगशाला परीक्षणों में पुष्टि हुई कि यह गोमांस है। पुलिस ने कहा कि अंसारी पर हमला करने वाले ग्रुप ने अंसारी द्वारा प्रतिबंधित मांस के कारोबार के संबंध में शिकायत की थी।

इस मामले ग्यारह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें बीजेपी का जिला मीडिया प्रभारी और मुख्य आरोपी दीपक मिश्रा और छोटू वर्मा भी शामिल है जिसका संबंध गौरक्षक समिति से भी है।

पुलिस के मुताबिक कुमार चित्रापुर का निवासी है जो रामगढ़ के रजरप्पा थाना क्षेत्र के अधीन है। रामगढ़ के एसपी किशोर कौशल ने बताया कि मुख्य आरोपी ने अंसारी के गाड़ी का नंबर राजकुमार को दिया था और उसकी गाड़ी का पीछा करने को कहा था। कॉल रिकॉर्ड में ये खुलासा हुआ है कि मिश्रा और वर्मा हमेशा कुमार के संपर्क में थे।

श्रोतों के मुताबिक मिश्रा ने पूछताछ में दावा किया कि उसने अंसारी को सिर्फ दो बार मारा था और इस बीच एक भीड़ जमा हुई और उस पर हमला करने लगी। नाम न बताने की शर्त पर एक स्थानीय अधिकारी ने बताया कि हमला करने वाले ग्रुप ने पुलिस का डंडा इस्तेमाल किया जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

अधिकारी ने कहा आरोपी ने अंसारी को प्रतिबंधित मांस के कारोबार के लिए पहले पकड़ने की कोशिश की लेकिन वह उसमें सफल नहीं हो सका।

अधिकारी ने कहा 'ईद से कुछ दिन कबल रामगढ़ पुलिस स्टेशन में वर्मा और मिश्रा ने शांति समिति की बैठक के दौरान इस मुद्दे को उठाया था। उन लोगों ने आरोप लगाया कि लोग बीफ का कारोबार शहर में कर रहे हैं लेकिन पुलिस उसे रोक नहीं रही है। उन्हें पुलिस की तरफ से आश्वस्त किया गया पुलिस इस पर कार्रवाई करेगी। हत्या से कुछ दिनों पहले इस ग्रुप के सूचना देने पर दो लोगों को मवेशी के स्मगलिंग में गिरफ्तार किया गया। लेकिन जिस दिन वे अंसारी की ताक में थे उन लोगों ने पुलिस को सूचित नहीं किया।'
 

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