जीएसटी की पेचीदगियों ने ई-कॉमर्स को भी नहीं छोड़ा, घट गई सेलर्स की तादाद

Written by Sabrangindia Staff | Published on: July 17, 2017
जल्दबाजी और बगैर तैयारी के जीएसटी लागू करने से मची अफरातफरी ने ऑनलाइन रिटेलरों को भी नहीं छोड़ा है। जीएसटी लागू हुए एक पखवाड़ा बीत चुका है लेकिन ऑनलाइन मार्केट प्लेस और सेलर्स अभी तक इसके प्रभाव का ही आकलन कर रहे हैं। 15 दिन बीत गए हैं लेकिन ऑनलाइन मार्केट प्लेर्स इंतजार करो और देखो की नीति पर चल रहे हैं। इस बीच सभी मार्केट प्लेस में सेलर्स की संख्या में 20 से 30 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

GST effect on E commerce

हालांकि ई-मार्केट के सेलर्स में यह आम धारणा है कि जीएसटी उनके लिए फायदेमंद है क्योंकि उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलेगा। लेकिन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म सेलर्स से जो मार्जिन और कमीशन लेते हैं,  उसमें कमी नहीं की गई है।  सेलर्स और वेंडर ई-कॉमर्स प्लेटफार्म से कमीशन पर सौदेबाजी में जुटे हैं।

ज्यादातर छोटे सेलर्स ई-प्लेटफॉर्म प्लेटफार्म से हट गए हैं। क्योंकि उनके पास स्टॉक नहीं है। टैक्स में बढ़ोतरी की वजह से कई सेलर्स ने नया माल लाना बंद कर दिया है। जैसे खिलौनों पर टैक्स पांच फीसदी से बढ़ा कर 12 फीसदी कर दिया गया है। मार्केट प्लेटफॉर्म इन छोटे सप्लायरों को समझाने में लगे हैं। लेकिन जीएसटी की जटलिताओं और कनफ्यूजन की वजह से सेलर्स यहां नहीं आ रहे हैं। सेलर्स के बीच यह भी कन्फ्यूजन है कि रिटर्न किस तरह फाइल करना है। क्या हर राज्य में हुई बिक्री का ब्योरा पेश करना होगा या सिर्फ टर्नओवर का जिक्र करना होगा।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अभी हाल में फिर कहा है कि जीएसटी बेहद आसान है और इसके बारे में निराधार अफवाहें फैलाई जा रही हैं लेकिन इंडस्ट्री के अलग-अलग सेगमेंट को इसकी जटिलताओं और अस्पष्टता की वजह से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इससे इन आशंकाओं को बल मिलने लगा है कि सरकार के पास इसे लागू करने का इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार नहीं है। आम लोग भी सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर जीएसटी में उन्हें जो फायदा होने का दावा किया जा रहा था वह कहां है। कई जगह छोटे व्यापारियों में यह अफवाह फैल गई है कि अगर उन्होंने जीएसटी रिटर्न भरा तो उनके पिछले रिकार्ड की जांच की जाएगी। दरअसल पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने जीएसटी लागू करने से पहले से कहा था कि मोदी सरकार के पास अभी इसे लागू करने का इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार नहीं है। अगर जल्दबाजी में इसे लागू किया गया तो भारी अफरातफरी, भ्रम और गलतियों का सामना करना पड़ सकता है। इससे देश की कारोबारी और आर्थिक गतिविधियों को चोट पहुंच सकती है। लेकिन सरकार जल्द से जल्द इसे लागू करने का श्रेय लेना चाहता थी। लेकिन 1 जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद एक पखवाड़ा बीत चुका है। अभी तक सरकार स्पष्टीकरण ही देती नजर आ रही है।  
 
 

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