भीम में हुई किसानों की जन सुनवाई, देश के विभिन्न प्रदेशों से आये किसानों ने लिया भाग

Written by Sabrangindia Staff | Published on: July 14, 2017
भीम, 14 जुलाई 2017:  आज मजदूर किसान शक्ति संगठन द्वारा पंचायत समिति के बाहर आयोजित जन सुनवाई में किसान मुक्ति यात्रा से आये हुए विभिन्न प्रदेशों के किसानों ने हिस्सा लिया. ज्ञातव्य है कि किसानों की क़र्ज़ माफ़ी और फ़सलों के उचित मूल्य की मांग को लेकर अखिल भारतीय  किसान संघर्ष समन्वय समिति  द्वारा आयोजित यह यात्रा मध्य प्रदेश के मंदसौर से शुरू हुई तथा महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से होते हुए 18 जुलाई को दिल्ली पंहुचेगी.  इस जनसुनवाई में उन्होंने आज अपनी बात रखते हुए स्थानीय किसानों की समस्याओं और धरातलीय स्थिति को समझा.


 
सुनवाई में आस पास के विभिन्न गांवों से आये किसानों ने अपनी बात रखी. स्वराज अभियान और जय किसान आंदोलन के नेता योगेन्द्र यादव ने किसानों को संबोधित करते हुआ कहा कि प्रधान मंत्री फसल बिमा योजना के नामे पर पूरे देश में फ्रॉड हो रहा है. बीमा कंपनियां करोड़ों रुपये बीमा प्रीमियम के तौर पर हर साल ले रही हैं, जिसमे से 0.5% भी किसानों को वापिस नहीं मिलता. जनसुनवाई में थाना गाँव से आये बालुलाल ने यह प्रस्ताव रखा की प्रति किसान के व्यतिगत खेत का हिसाब हो और उस पर ही उनको मुआवज़ा दिया जाए. अखिल भारतीया किसान संगर्ष समन्वय समिति के संजोजक सरदार वी. एम. सिंह ने कहा कि आज किसानों की नसल और फसल दोनों खत्म हो रही है. उन्होंने उपस्थित किसानों से यह भी अनुरोध किया की वह 18 जुलाई को दिल्ली आकर मोदी सरकार से पूर्ण क़र्ज़ माफ़ी की मांग करे.
 
पालूना गाँव से आये चुन्नी सिंह ने कहा की बगेरा की ज़मीन का बहुत बड़ा घोटाला चल रहा है जिसका बंदोबस्त कई सालों से नहीं किया गया जिसका समर्थन किसान यात्रा के साथियों ने भी किया. उन्होंने बताया कि आज खेत में आ कर गिरदावरी करने की बजाए ऑफिस में बैठे-बैठे ही गिरदावरी हो जाती है. मजदूर किसान शक्ति संगठन के कार्यकर्ता शंकर सिंह ने सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को बीमा योजना में शामिल नहीं किये जाने की समस्या को भी उठाया. सांगावास पंचायत के सवाई सिंह ने बताया कि घर और खेती की ज़मीन हाईवे निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण के द्वारा सरकार द्वारा ली जा रही है किन्तु उसका उचित मुआवज़ा नहीं दिया जा रहा है. उन्होंने सभी किसानों को इस मुद्दे पर संगठित होने की अपील की.



कई किसानों ने शोचालय न होने से सरकारी योजनायों का लाभ व नरेगा में काम न मिलने की बात उठाई. कालादेह पंचायत के भीलखेडा गाँव के 21 लोगों की सूची भी दी गयी जिन्हें शोचालय न होने के कारण नरेगा में काम नहीं दिया जा रहा. सभी ने इस मांग का समर्थन किया कि सरकार इस मामले में दवाब न बनाये और किसी को शोचालय न होने पर वंचित न किया जाए.
 
इस जनसुनवाई में यह ज्ञात हुआ कि भीम सहकारी समिति से जुड़े हुए किसानों का फसली बिमा तो नियमित रूप से कटता रहता है परन्तु उन्हें या तो मुआवज़ा नहीं मिलता या उसकी राशि बहुत कम होती है. यह भी पता लगा की खराबा तय करने की प्रक्रिया भी अत्यंत जटिल है. सरकार द्वारा अकाल घोषित कर स्वयं उसका मुआवज़ा देने के बावजूद उसी फसल पर बिमा कंपनियों ने कोई मुआवज़ा नहीं दिया. इस क्षेत्र के छोटे किसानो ने पूर्ण क़र्ज़ माफ़ी की मांग रखी और कहा की वे आजीवन क़र्ज़ के बोझ तले दबे रह जाते है.
 
इसी प्रकार खेती की लागत दिन प्रतिदिन बढती जा रही है किन्तु किसानो को बाज़ार में अपनी फसल का वाजिब दाम नहीं मिलता. बीज से लेकर खाद और कीटनाशक के दाम बढ़ रहे हैं और  सिचाई के अभाव में काफी किसान बारिश पर ही आश्रित हैं. कुछ किसान ट्यूबवेल का प्रयोग करते हैं किन्तु बिजली कनेक्शन नहीं होने के कारण उन्हें डीजल का प्रयोग करना पड़ता है जो की महँगा पड़ता है. बिजली कनेक्शन के आवेदन भी लम्बे समय तक लंबित रहते हैं और उन पर कोई कार्यवाही नहीं होती. या तो फसल किसी न किसी कारण से ख़राब हो जाती है या अगर फसल अच्छी हो तो उसका उचित दाम नहीं मिलता.


 
देश भर में किसानों की स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है. इसलिए आज अन्नदाता को आंदोलन के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है. क्षेत्र के किसानों ने देश भर में उठी किसानों की मांग का समर्थन करते हुए निम्न मांगे रखीं:
  • आज प्राइवेट कंपनियां बीमा के नाम पर बहुत प्रीमियम ऐंठ रही हैं परन्तु उसका मुआवजा नहीं मिलता. इसके लिए उचित नियम बनाए जाएँ.
  • क्षेत्र के किसानों की ज़मीन हाईवे निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण के द्वारा सरकार द्वारा ली जा रही है. किन्तु उसका उचित मुआवज़ा नहीं दिया जा रहा है. पुराने रेट के अनुसार मुआवज़ा दिया जा रहा है. हम मांग करते हैं कि अधिग्रहित भूमि का मुआवज़ा वर्तमान डी एल सी रेट से दिया जाए.
  • जैसा कि स्वामीनाथन कमिटी ने शिफारिश की और चुनाव के समय सरकार ने वादा भी किया, किसानों की आमदनी कम से कम उसकी लागत का 50% हो.
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद हो और सभी फसलों पर समर्थन मूल्य तय किये जाएँ और उनका बीमा किया जाए.
  • स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाए और किसानों के ऋण माफ़ हों.
  • शोचालय न होने पर किसी भी परिवार को नरेगा और अन्य सरकारी योजनायों से वंचित न रखा जाए.
 
(मज़दूर किसान शक्ति संगठन की ओर से)

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