राष्ट्रपति का अंगरक्षक बनने के लिए संवैधानिक समानता बेमानी, दलित-आदिवासी नहीं बन सकते बॉडी गार्ड

Written by Sabrangindia Staff | Published on: August 11, 2017
भारत में केंद्र और राज्य सरकारें अकसर संविधान को सबसे ऊपर रखने की बात करती है। इन सरकारों से हमेशा ये कहते सुना जाता है कि संविधान सबसे ऊपर है लेकिन कुछ मामलों में संविधान को ताक पर रख दिया जाता है। संविधान में समानता का अधिकार तो दिया गया है लेकिन राष्ट्रपति का अंगरक्षक बनने के लिए इसे दरकिनार कर दिया गया। जाहिर है हर कोई अपने फायदे के लिए संविधान की बात करता है और उसे छोड़ता है।

president Bodygaurd

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति के अंगरक्षक के लिए भर्तियां निकाली गई है और उसमें साफ तौर पर दलित, आदिवासी, मजहबी और रामदासिया को इस भर्ती में शामिल होने से मना कर दिया गया। देश को काफी जमाने के बाद राष्ट्रपति के रूप में दलित व्यक्ति मिले लेकिन दलित ही उनके अंगरक्षक नहीं हो सकते हैं।
 
 रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति अंगरक्षक की सितंबर महीने में भर्ती रैली होगी। निदेशक एवं सेना भर्ती निदेशक, भर्ती कार्यालय हमीरपुर के अनुसार इस भर्ती रैली में सिख (मजहबी, रामदासिया, एससी और एसटी को छोड़कर) जाट और राजपूत की भर्ती की जाएगी। इस भर्ती रैली में उपयुक्त उम्मीदवार नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति अंगरक्षक भवन में चार सितंबर को सुबह 7:30 बजे पहुंचना सुनिश्चित करें। भर्ती रैली में साढ़े 17 से 21 वर्ष आयु वर्ग के उम्मीदवार भाग ले सकते हैं।
 
भर्ती के लिए उम्मीवार की शैक्षणिक योग्यता 45 प्रतिशत अंकों के साथ दसवीं अथवा दस जमा दो तथा उम्मीदवार की लंबाई 6 फुट (183 सेंटीमीटर) और सिख, जाट और राजपूत वर्ग से होना अनिवार्य है।
 
उम्मीदवार को भर्ती के समय 10वीं कक्षा उत्तीर्ण अंक तालिका और प्रमाण-पत्र, डोमिसाइल प्रमाण-पत्र, जाति प्रमाण-पत्र, चरित्र प्रमाण-पत्र (6 माह पुराना नहीं होना चाहिए), रंगीन फोटोग्राफ, राशन कार्ड, एनसीसी/स्पोर्ट्स प्रमाण-पत्र और आधार कार्ड साथ ले जाना होगा।
 

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