आदिवासी स्कूलों में आए 3 करोड़ खर्च लेकिन सामानों का पता नहीं

Written by Sabrangindia Staff | Published on: June 19, 2017
मध्यप्रदेश के शियोपुर के आदिवासी स्कूल के लिए सरकार की तरफ से बजट से तीन करोड़ रूपए अधिक आवंटित किए गए। उसे खर्च भी कर दिया गया लेकिन स्कूलों में सामानों का कोई पता नहीं है और रिकॉर्ड भी गायब है।

Adivasi Schools
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जिला शिक्षा समिति अध्यक्ष सीमा जाट के अनुसार जिला शिक्षा समिति की बैठकों में आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त आते हैं लेकिन जानकारी नहीं लाते। अब तक कोई हिसाब नहीं दिया। अधिकारी मनमानी कर रहे हैं। इसमें घोटाले के पूरी संभावना है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आदिवासी की आबादी वाले ब्लॉक कराहल में संचालित स्कूलों के लिए सरकार ने तीन करोड़ रुपए से ज्यादा का बजट भेजा था। स्कूलों में छात्र-छात्रों की सुविधाओं के लिए भेजे गए इस बजट को आदिम जाति कल्याण विभाग के अधिकारियों ने ठिकाने लगा दिया। विभाग के अधिकारी करीब 30 लाख रुपए खर्च होना की बात कर रहे हैं। जबकि 3 करोड़ से अधिक का सामान खरीदा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने आदिवासी बच्चों के लिए स्कूलों में अलमारी, फर्नीचर, कुर्सियां सहित अन्य सामान खरीदने के लिए साल 2015-16 में बजट पारित किया था। साल की अंत में बजट में आवंटित राशि को लैप्स होने से बचाने के लिए अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रख कर 3 करोड़ रुपया खर्च कर दिया और दूसरे वित्तीय साल यानी 2016-17 में स्कूलों में सामानों की खरीद का ब्यौरा भेज दिया। इसमें विक्रेताओं के बिलों का भुगतान किया है। 

विधायक दुर्गालाल विजय के मुताबिक उन्होंने विधानसभा में प्रश्न किया था। विधानसभा ने इसकी जांच कराई है। जांच के संबंध में 17 जुलाई को विधानसभा में पूछेंगे। उन्होंने कहा कि मामला गंभीर है इसलिए मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कराएंगे। 

रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में आरटीआई के तहत पिछले महीने जानकारी मांगी गई। जानकारी के अनुसार साल 2015 में सामानों का खरीदना स्वीकारा गया है। लेकिन राशि करीब 30 लाख रुपए दर्शाई गई है। जबकि जिला कोषालय में साल 2015-16 में सामानों खरीदारी का बिल करीब 3 करोड़ दर्ज है।

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